प्रवासी मजदूरों पर भारी संकट

प्रवासी मजदूरों पर भारी संकट 
बिहार के बेगूसराय से पांच माह पहले दिल्ली आए भूपेश कुमार (22) ने बताया कि वह स्नातक की पढ़ाई कर रहा था लेकिन घर की खराब माली हालत के कारण वह काम करने दिल्ली आया और यहां राज मिस्त्री का काम सीख रहा था। कोरोना के कारण काम पिछले सप्ताह ही बंद हो गया था और अब न काम मिल रहा है और न वापस जा पा रहे हैं। ऐसी ही कहानी रंगाई पुताई का ठेका लेने वाले अंजनी मिश्रा की है। उसने अपने साथ काम करने वाले पांच मजदूरों को घर जाने के लिए कह दिया है। उसने बताया कि वह बिहार के रक्सौल का रहने वाला है और वापस जाना चाहता है लेकिन बस-रेल बंद होने के कारण फंसा हुआ है। बॉर्डर सील होने के कारण टैक्सी चालक भी उसे ले जाने के लिए तैयार नहीं हैं। " alt="" aria-hidden="true" />


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कुछ ऐसी बानगी पूर्वी मिदनापुर, पश्चिम बंगाल निवासी निर्माण मजदूर मनोज बरिक ने बताई कि उसे मजदूरी कर 300 रुपये मिलते थे लेकिन किसी तरह वह पांच लोगों के परिवार का भरण पोषण कर रहा था। पिछले सप्ताह से काम पूरी तरह बंद है और वापस जाने के लिए कहा गया है। अब कोई रेल या बस नहीं चल रही है जिससे वापस च
दिलशाद गार्डन स्थित एल ब्लॉक निवासी महिला मरीज से संक्रमित हुए मोहल्ला क्लीनिक के डॉक्टर को सफदरजंग अस्पताल में रेफर किया गया है। जीटीबी अस्पताल में उनका उपचार चल रहा था। वहां से उन्हें सफदरजंग अस्पताल में रेफर कर दिया गया है। डॉक्टर जिस महिला से संक्रमित हुए हैं, उसने अपने परिवार के चार सदस्यों व एक पड़ोसी को भी संक्रमित किया है।
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दिल्लीः